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|| झूठी आस ||

मन नहीं लग रहा तुम्हारे बिन, हम आज बहुत उदास बैठे है, आंखे बंद कर याद करते है बीते हुवे वो लम्हे, एहसास होता है कि हम तुम्हारे पास बैठे है! आंखे खुली तो पता चला, लगा झूठी हम आस बैठे है, कर रहे है जिस शख्स का इंतजार, वो तो किसी और के हाथों में डाल हाथ बैठे है! अब देखा नहीं जाता मुझसे ये सब, मरने की इक्छा जहर ले हाथ बैठे है, और कमीने दोस्त पाल रखे है मैंने, ठेके पर ले मुझे अपने साथ बैठे है!                                     Sanghrash singh rajput

मंजिल

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मंजिल तो मिल जाएगी पर चलना तुमको पड़ेगा ! जो राह जाती तेरे मंजिल की ओर, है बड़ी कठिन वो पर उस राह को सरल बनाना तुमको पड़ेगा ! मंजिल के सफर में बन बाधा खड़ी होंगी कई दीवारे पर चढ़ उसपर उसके पार जाना तुमको पड़ेगा ! राह में आएगी रुकावटे हज़ार पर उन रुकावटो से लड़ना तुमको पड़ेगा ! सायद ना मिले तुझे कोई हौसला देने वाला  पर खुद को हौसला दिलाना तुमको पड़ेगा ! पर याद रख ए इस मंजिल के मुसाफिर इतनी कठिनाइयों के बाद तू आसमाँ को छू पाएगा ! जो कल तक तुमसे बाते नहीं करते थे  आज बाते करने को तुमसे इजाजत लेना सबको पड़ेगा ! मंजिल तो मिल जाएगी पर चलना तुमको पड़ेगा !                      Sanghrash singh rajput...