आत्महत्या एक पाप
क्या सही है अपनो को छोड़ जाना,
क्यु बनते है हम इस पाप के भागी,
अरे मरना तो सभी को है,
पर क्या जायज़ है इस तरह मौत को गले लगाना !
क्या सही है सबको रुला जाना,
वो धरती पर किस को अनश्वर भेजा है,
वो खुद ही तुम्हे अपने पास बुला लेगा,
पर क्या जायज़ है इस तरह मौत को गले लगाना !
क्या सही है अपनो को जीते जी मार जाना,
खुद की सांसें बन्द कर लोगे तुम,
अपने लिए ना सही, अपनो के लिए जी लो तुम,
पर क्या जायज़ है इस तरह मौत को गले लगाना !
क्या सही है कायरो की तरह अपना अस्तित्व मिटाना,
सुख-दुख, दर्द, तकलीफ, संघर्ष ये तो उसके नियम है,
अरे यही तो जीवन है,
पर क्या जायज़ है इस तरह मौत को गले लगाना !
🖋️संघर्ष सिंह...
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