दिल की बात...

 दिल की बात भला कौन सुन पाता है 

रो तो हम भी सकते है

पर आँशु पोछने कहा कोई आता है!


दर्द होता है तो सह लेते है

आधी रात को घर के किसी कोने में

अकेले बैठ रो लेते है!


घुटते रहे, दर्द को पीते रहे खुद ही 

रोता कहा हु मै, ये आँशु तो खुद ही बह आता है

दिल की बात भला कौन सुन पाता है!


इस मतलबी दुनिया मे बिना मतलब

तुम्हे याद कर मिलने कहा कोई आता है

दिल की बात...........

                     संघर्ष सिंह



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