|| झूठी आस ||
मन नहीं लग रहा तुम्हारे बिन, हम आज बहुत उदास बैठे है, आंखे बंद कर याद करते है बीते हुवे वो लम्हे, एहसास होता है कि हम तुम्हारे पास बैठे है! आंखे खुली तो पता चला, लगा झूठी हम आस बैठे है, कर रहे है जिस शख्स का इंतजार, वो तो किसी और के हाथों में डाल हाथ बैठे है! अब देखा नहीं जाता मुझसे ये सब, मरने की इक्छा जहर ले हाथ बैठे है, और कमीने दोस्त पाल रखे है मैंने, ठेके पर ले मुझे अपने साथ बैठे है! Sanghrash singh rajput